दर्द भरी शायरी : साँस थम जाती है पर जान नहीं जाती
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| Dard Shayari in Hindi |
साँस थम जाती है पर जान नहीं जाती,
दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती,
अजीब लोग हैं इस ज़माने में ऐ दोस्त,
कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती।
फिर से एक उम्मीद पाल बैठी हूँ,
फिर से तेरे पते पर चिट्टी डाल बैठी हूँ।
उसने भी मेरे कत्ल की साजिश में कोई कसर न छोड़ी,
जिसकी जिंदगी के वास्ते हर दरगाह पर जाकर दुआ की थी हमने।
लिखते हैं सदा उन्ही के लिए,
जिन्होंने हमे कभी पढा ही नही।?
तुम मूड में नहीं थे तो क्यू बनाया मुझे रब,
मिट्टी दुबारा गुथो और फिर से बनाओ मुझे।
भूख घूम रही है शहर की हर सड़क पर,
लाल टीशर्ट ज़ोमेटो की पहन कर।
लोग बाज़ार मे आके बिक भी गये,
मेरी क़ीमत लगी की लगी रह गयी। ?
वो जो कहते थे हम आपसे ही बात करते हैं,
वो ना जाने अब कितनों से बात करते हैं।
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